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क्रोध या गुस्सा : एक धीमा जहर…..

gussa or krodh

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में क्रोध या गुस्सा एक सामान्य प्रतिक्रिया बन गया है, लेकिन जब यह अनियंत्रित हो जाता है, तो यह केवल हमारे रिश्तों को ही नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व को भी भीतर से खोखला करने लगता है। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि क्रोध का एक क्षण हमारे शरीर के तंत्र को घंटों तक अस्त-व्यस्त कर सकता है।

गुस्सा आने के मुख्य कारण

क्रोध आने के पीछे ज्योतिषीय, शारीरिक और मानसिक तीनों तरह के कारण हो सकते हैं:

आज मुख्य रूप से ज्योतिषीय कारण पर चर्चा करेंगे बाकि दोनों शारीरिक और मानसिक पर आने वाले दिनों में चर्चा करेंगे

ज्योतिषीय कारण: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल (Mars) ग्रह क्रोध का मुख्य कारक है, लेकिन अन्य ग्रहों की स्थितियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:

जब मंगल पीड़ित होता है या नीच राशि में होता है, तो व्यक्ति को अत्यधिक गुस्सा आता है। इसके अलावा, कमजोर चंद्रमा मन को अशांत बनाता है और सूर्य अहंकार के कारण क्रोध पैदा करता है।

  1. मंगल (Mars): क्रोध का मुख्य कारक

मंगल को “अग्नि तत्व” का ग्रह माना जाता है। यह साहस, शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है।

जब कुंडली में मंगल राहु या शनि के प्रभाव में होता है, तो व्यक्ति को बहुत जल्दी और तीव्र क्रोध आता है। मंगल की प्रबलता व्यक्ति को आक्रामक और अडिग बना सकती है।

  1. सूर्य (Sun): अहंकार और शासन का क्रोध

सूर्य भी अग्नि तत्व प्रधान है। सूर्य के कारण आने वाला क्रोध अक्सर “अहंकार” या “सम्मान” को ठेस पहुँचने पर आता है। सूर्य का क्रोध मंगल की तरह हिंसक नहीं होता, बल्कि इसमें एक प्रकार का दबदबा और अनुशासन की चाह होती है।

  1. चंद्रमा (Moon): मानसिक अशांति

चंद्रमा मन का कारक है। यदि चंद्रमा कमजोर हो या पाप ग्रहों (जैसे शनि या राहु) से पीड़ित हो, तो व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर रहता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति चिड़चिड़ेपन के कारण क्रोध करता है। यह क्रोध भीतर की बेचैनी का परिणाम होता है। कमजोर चंद्रमा व्यक्ति को भीतर से बेचैन रखता है, जिससे वह छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता है।

  1. राहु (Rahu): अचानक और अनियंत्रित क्रोध

राहु भ्रम और अतिशयोक्ति का ग्रह है। जब राहु मंगल या सूर्य के साथ युति बनाता है, तो यह क्रोध को कई गुना बढ़ा देता है। राहु के प्रभाव से व्यक्ति बिना सोचे-समझे अचानक और अनियंत्रित व्यवहार करने लगता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अग्नि तत्व की राशियों के जातकों में स्वाभाविक रूप से ऊर्जा और आक्रामकता अधिक होती है, जिसके कारण उन्हें क्रोध जल्दी आता है। ये प्रमुख राशियां हैं:

मेष (Aries): इस राशि का स्वामी मंगल है, जो ऊर्जा और आवेश का प्रतीक है।

सिंह (Leo): इस राशि का स्वामी सूर्य है, जो अहंकार और तेज के कारण क्रोध उत्पन्न करता है।

धनु (Sagittarius): अग्नि तत्व होने के कारण इस राशि के जातक भी स्वभाव से थोड़े उग्र हो सकते हैं।

इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल, राहु के साथ (अंगारक योग) हो या मंगल नीच राशि में हो, तो उसे बेकाबू और हिंसक बनता है।

 

क्रोध के चार चरण (Four Stages of Anger): क्रोध की प्रक्रिया इन चार चरणों में पूरी होती है:

अभिलाषा (Desire/Expectation): यह क्रोध का आधार है; जब हमारी कोई इच्छा या अपेक्षा पूरी नहीं होती, तो बीज यहीं बोया जाता है।

चिंगारी (Trigger): कोई छोटी बात या घटना जो दबी हुई इच्छा को उत्तेजित कर दे।

विस्फोट (Explosion): जब व्यक्ति अपने शब्दों या कार्यों के माध्यम से क्रोध का प्रदर्शन करता है।

परिणाम (Consequences): क्रोध शांत होने के बाद होने वाला शारीरिक, मानसिक या सामाजिक नुकसान।

 

गीता में क्रोध के बारे में क्या लिखा गया है?

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 62-63 में भगवान कृष्ण ने क्रोध के विनाशकारी मार्ग को बहुत सुंदरता से समझाया है:

“क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥”

इसका अर्थ है:

विषयों का चिंतन: जब मनुष्य भौतिक सुखों या विषयों के बारे में सोचता है, तो उनमें आसक्ति (attachment) पैदा होती है।

इच्छा और क्रोध: आसक्ति से काम (इच्छा) पैदा होती है, और इच्छा पूरी न होने पर क्रोध जन्म लेता है।

सम्मोह और मति-भ्रम: क्रोध से अत्यंत मूढ़ भाव (सम्मोह) पैदा होता है, जिससे स्मृति भ्रमित हो जाती है।

बुद्धि का नाश: स्मृति भ्रमित होने से मनुष्य की विवेक शक्ति या बुद्धि का नाश हो जाता है।

पतन: और जब बुद्धि का नाश होता है, तो अंततः मनुष्य का पूर्ण पतन हो जाता है।

अतः गीता के अनुसार क्रोध वह अग्नि है जो सबसे पहले उसे चलाने वाले की अपनी बुद्धि को ही जलाकर भस्म कर देती है।

 

आध्यात्मिक और ज्योतिषीय उपाय

मंत्र और ध्यान: नियमित रूप से ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करना मंगल (क्रोध के कारक) को शांत करता है। साथ ही, नियमित ध्यान (Meditation) मन को शांत रखने का सबसे स्थायी तरीका है।

शिव उपासना: सोमवार को भगवान शिव की पूजा और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप चंद्रमा को मजबूत करता है, जिससे मन का चिड़चिड़ापन और उदासी कम होती है।

गुस्सा शांत करने के ज्योतिषीय उपाय (टोटके)

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल और चंद्रमा को शांत रखकर क्रोध पर विजय पाई जा सकती है:

चंदन का तिलक: प्रतिदिन स्नान के बाद माथे पर चंदन का तिलक लगाएं, यह मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है।

हनुमान चालीसा का पाठ: मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान चालीसा का पाठ: मंगल को शांत करने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है।

तांबा या मूंगा: इन्हें धारण करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें, क्योंकि ये मंगल की ऊर्जा को बढ़ा भी सकते हैं।

इन उपायों को अपनाकर आप अपने क्रोध को सकारात्मक ऊर्जा में बदल सकते हैं।

 

शांति के लिए कुछ सरल उपाय:

ठंडा जल: चांदी के गिलास में पानी पीने से चंद्रमा मजबूत होता है और मन शांत रहता है।

योग और प्राणायाम: विशेष रूप से ‘शीतली’ प्राणायाम क्रोध को नियंत्रित करने में सहायक है।

 

 

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