क्रोध या गुस्सा : एक धीमा जहर…..

gussa or krodh

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में क्रोध या गुस्सा एक सामान्य प्रतिक्रिया बन गया है, लेकिन जब यह अनियंत्रित हो जाता है, तो यह केवल हमारे रिश्तों को ही नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व को भी भीतर से खोखला करने लगता है। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही मानते हैं कि क्रोध का एक क्षण हमारे शरीर … Read more

प्रकृति से विमुख होता मनुष्य: एक संस्कृति का अवसान

nature

पिछले दिनों गाँव की पगडंडियों पर टहलते हुए एक पुराने परिचित बुजुर्ग से मुलाकात हुई। वे अपनी झुकी हुई कमर और धुंधली आँखों के साथ सूखे हुए पोखर की मेड़ पर बैठे शून्य को निहार रहे थे। जब मैंने उनसे बारिश और आने वाली फसल के बारे में पूछा, तो उनके चेहरे पर एक अजीब … Read more

अंतर्मन की अनंत यात्रा: सर्वोच्च शक्ति से एकाकार

अंतर्मन की अनंत यात्रा

अक्सर हम अपने जीवन की दैनिक समस्याओं, शारीरिक सीमाओं और मानसिक थकावट के कारण स्वयं को अत्यंत दुर्बल मान लेते हैं। हमें लगता है कि हम नियति के हाथों की कठपुतली हैं। श्रीमद्भगवद्गीता का उद्घोष है कि मनुष्य केवल वह नश्वर शरीर नहीं है जिसे उसने धारण किया है, बल्कि वह उस अविनाशी आत्मा का … Read more

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